वरूण
पोड़ैयाहाट (गोड्डा):
त्रिवेणी बियर के पास तटबंध टूटने से पोड़ैयाहाट व गोड्डा के सैकड़ों किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। संवेदक और विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण टूटे तटबंध की मरम्मत एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद नहीं हुई, जिससे किसानों की फसलें नष्ट हो गईं और खेत बंजर हो गए। नदी का रुख बदलने से डांड़ै बहियार की ओर पानी बह रहा है, जिसके चलते तकरीबन 100 एकड़ जमीन बालू से ढक गई और एक दर्जन से अधिक किसानों के खेत गड्ढों में तब्दील हो गए। प्रभावित किसानों के सामने अब साल भर भोजन की चिंता सताने लगी है।
किसानों की बर्बादी का कारण बना तटबंध का टूटना :
स्थानीय किसानों बबली सिंह, रामजीवन साह और निरंजन मंडल ने बताया कि त्रिवेणी बियर के बाएं तटबंध के टूटने से धान की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। उनका आरोप है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने तटबंध की गुणवत्ता हमेशा संदिग्ध रही है। हर बार तेज बहाव में तटबंध टूट जाता है, जिसके बाद मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है। इस बार भी यही हुआ। किसानों का कहना है कि तटबंध को ठेकेदारी के लिए बनाया जाता है, न कि मजबूती के लिए।
कैनाल पक्कीकरण का अधूरा कार्य जिम्मेदार :
त्रिवेणी बियर से सैकड़ों गांवों के लिए पानी की आपूर्ति करने वाली कैनाल का पक्कीकरण कार्य अधूरा होने के कारण यह समस्या और गंभीर हो गई है। 2019 में शुरू हुआ कैनाल पक्कीकरण का कार्य, जो डकाय बियर से त्रिवेणी बियर तक पानी लाने की योजना का हिस्सा था, कई जगहों पर अधूरा छोड़ दिया गया। विशेष रूप से त्रिवेणी बियर और डकाय बियर के मिलन स्थल पर ठेकेदार द्वारा आधा-अधूरा काम किया गया, जिसके कारण तेज बहाव में तटबंध टूट गया और पानी बहियार की ओर बहने लगा। वहीं दूसरी और त्रिवेणी बियर के पास पानी जमा नहीं रहने से मोहानी, तेलियातिकर, रतनपुर, जगन्नाथपुर, माधुरी, सरबा, रणाबांध, कोड़ासी, अमलो, गंगटा फंसिया, लीलादह, बोहरा, जलगो, दूधियाबाड़ी, बिरनिया, मानिकपुर, बिहारीजोर सहित गोड्डा प्रखंड के दर्जनों गांव प्रभावित हुए हैं। क्योंकि करोड़ों रुपए के लागत से बने कैनाल का पक्की कारण तू हुआ लेकिन उसमें पानी जा ही नहीं पा रहा है।
किसानों की जीवन रेखा पर संकट
त्रिवेणी बियर पश्चिमी पोड़ैयाहाट और गोड्डा प्रखंड के हजारों किसानों की जीवन रेखा है। करोड़ों रुपये की लागत से बने कैनाल के बावजूद, तटबंध टूटने से पानी कैनाल तक नहीं पहुंच पा रहा, जिससे सैकड़ों हेक्टेयर खेतों की सिंचाई प्रभावित हो रही है। स्थानीय मुखिया सपना ने बताया कि कई बार अखबारों के माध्यम से इस समस्या को उठाया गया, लेकिन विभाग ने कोई ध्यान नहीं दिया। ठेकेदार बीच में ही काम छोड़कर फरार हो गया उसे समय भी विभाग को इसकी जानकारी दी गई थी कि इसको यथाशीघ्र मरम्मत कर लिया जाए लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। उनका कहना है कि अगर समय रहते नहर का काम पूरा कर लिया जाता, तो किसानों को इतना बड़ा नुकसान नहीं उठाना पड़ता।
विभागीय लापरवाही और मुआवजे की मांग :
किसानों ने संवेदक और विभागीय अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि तटबंध की मरम्मत के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। दैनिक जागरण ने इस मुद्दे को पहले भी प्रमुखता से उठाया था, लेकिन विभाग की उदासीनता के कारण स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रभावित किसानों ने जिला प्रशासन से मुआवजे की मांग की है, ताकि उनकी क्षति की कुछ हद तक भरपाई हो सके।
त्रिवेणी बियर तटबंध टूटने और कैनाल पक्कीकरण के अधूरे कार्यों ने गोड्डा और पोड़ैयाहाट के किसानों को गहरे संकट में डाल दिया है। विभागीय लापरवाही और ठेकेदारों की गैर-जिम्मेदारी के कारण हजारों किसान बेबस और लाचार हैं। अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो क्षेत्र में कृषि संकट और गहरा सकता है।
रिपोर्ट: वरूण
